सुसून

हो जन जाति के अनुसार इस दुनिया के मौसम आधारित क्रियाकलापो की प्रस्तुति सुसुन (नाच) है। हो आदिवासी आम तौर पर एक दूसरे में समंजस्य बना कर नृत्य करते हैं। जो प्रकृति के समीप हैं। हो आदिवासी के नृत्य की खासियत यह है कि वे रात भर नृत्य करके भी अगाते (संतुष्ट) नही होते हैं। हो आदिवासीयो की नृत्य, महिलाओं और पुरुषों में एक दूसरे को सम्मान देने का अभूतपूर्व मिसाल है। सुसुन की शुरुआत लुकु बाबु और लुकु मई के काल से चला आ रहा है।

 

 

दमा दुमेंग   बनाम  रुतू  सुसून  दुरं किलि